Char Dham ke Naam: चार धाम यात्रा शुरू करने से पहले इन अनसुनी बातों के बारे में जान लें

Char Dham ke Naam: हिन्दुओं का सबसे पवित्र यात्रा यानि की चार धाम यात्रा। कहा जाता है की जो भी व्यक्ति एक बार में चार धाम का यात्रा पूरा कर लेता उसके सारे रोग दुख दूर हो जाते है और उसकी सारी मनोकामना पूरी हो जाती है तथा उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। चार धाम कौन-कौन से है (Char Dham kaun kaun se hain) और इनकी गाथा क्या है।

सभी हिंदू भाई एवं बहनों को पता ही होगा कि चार धाम की यात्रा का बहुत ही बड़ा महत्व होता है। लेकिन यह चार धाम कौन-कौन से है (Char Dham ke Naam) और उनकी क्या-क्या गाथाएं हैं ये हम आज आपको बताने जा रहें है। हमारे बहुत से पौराणिक किताबों और ग्रंथो में यह बात बताई गयी है कि जो भी व्यक्ति चार धाम की यात्रा पूरा करता है उसे बहुत ही अधिक फल की प्राप्ति होती है।

Char Dham Yatra Name: चार धाम यात्रा

Char Dham Yatra Name: हमारे हिंदू ग्रंथ और पुराण जो की बहुत बड़ा है और इसे हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व और धर्म के साथ पूजा जाता है। और माना जाता है की इन सभी ग्रंथ में जो भी बात बताया जय है वो बिलकुल सत्य है। और होता भी ऐसा ही है। और हमारे ग्रंथों में चार धामों का बहुत ही बड़ा महत्व दर्शाया गया है। इसीलिए चलिए जानते हैं की ये चार धामों की यात्रा करने से क्या-क्या फल मिलते हैं और चार धाम कौन-कौन से हैं।

चार धाम कोई एक जगह पर या किसी एक राज्य में नहीं है। और उनकी यात्रा शुरू करने की भी एक अलग ही परंपरा है। की यात्रा कहाँ से शुरू करते हुए किस स्थान पर खत्म करना है। और इन चार धाम का यात्रा करने से आपको क्या-क्या फल मिलेंगे और किस-किस चीज की प्राप्ति होगी ये सब आपको यात्रा सुरु करने से पहले जान लेना चाहिए।

और उससे भी ज्यादा आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए की आपको किस तरह से यात्रा शुरू करनी और किस जगह पे पूरी करनी है। किस जगह से इस यात्रा के लिए जल उठाना है। और इसीलिए इन सभी बातों का हम पूरी तरह से उल्लेख और खुलासा करने जा रहे हैं। जहां तक हमें पता है हम इस बात की सच्चाई को पूरी तरह से आप लोग के सामने रखने की कोशिश करेंगे। तो चलिए जानते हैं इन चार धामों की यात्रा के लिए सबसे पहले किस स्थान पर जाना है और कहां से जल उठाना है।

चार धाम यात्रा की शुरुआत कहां से करें – Char Dham ke Naam

चार धाम यात्रा की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले आपको उत्तराखंड के एक जिला उत्तरकाशी के गढ़वाल में 3293 मी की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री नामक एक है। यहां से सबसे पहले जल को अपने डिब्बा या कलश में भरकर आगे की यात्रा की शुरुआत कर सकतें है। इस जल को उठाने के बाद सभी श्रद्धालु एवं भक्तगण गंगोत्री की ओर आगे बढ़ते हैं। वह गंगोत्री भी उत्तराखंड में ही स्थित है।

गंगोत्री पहुंचने के बाद उसी डिब्बे में माँ गंगा के पावन जल को भरने के बाद यमुना तथा गंगा जी के जल को लेकर आगे की ओर बढ़ते हुए सबसे पहले अपने चार धामों में से एक धाम में पहुंचते हैं श्रद्धालु एवं भक्तगण। तो चलिए जानते हैं कि पहले चार धाम का स्थान (Char Dham Kaun Kaun se hain) और देवस्थान कौन सा है।

Char Dham Kaun Kaun se hain – चार धाम कौन-कौन से है?

Char Dham ke Naam
Char Dham ke Naam

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1) बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड – Char Dham ke Naam

Char Dham Kaun Kaun se hain: भारत के उत्तरी छोर एवं हिमालय के गोद में बसा बद्रीनाथ धाम हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। बद्रीनाथ धाम हिन्दू धर्म में बहुत ही बड़ा महत्व रखते हैं। और उन चार धर्मों में से सबसे पहले नंबर पर बद्रीनाथ धाम ही आता है। और इस मंदिर को बद्रीनाथ धाम या बद्री नारायण मंदिर भी कहा जाता है।

इस मंदिर में श्री हरि भगवान विष्णु जी की पूजा-अर्चना की जाती है। यह मंदिर हिंदुओं को समर्पित मंदिर है। जो की उत्तराखंड के बद्रीनाथ शहर में स्थित है। और यहीं से पहले चार धाम की यात्रा की शुरुआत की जाती है। और इस चार धामों में से बद्रीनाथ का प्रथम स्थान आता है। और यहीं से भक्तगण सबसे पहले अपनी यात्रा को प्रारंभ करते हैं। ये बात पौराणिक कथाओं और ग्रंथो में भी है।

2) द्वारका नगरी गुजरात – Char Dham Yatra Name

भारत के पश्चिमी छोर पर स्थित है द्वारका नगरी जो की गुजरात में पड़ता है। तथा ये भी चार धामों में से एक है और ये मंदिर ग्रांटों के अनुसार दूसरे नंबर पर आता है। और अगर ग्रंथों की माने तो बद्रीनाथ के दर्शन के बाद आपको द्वारका नगरी ही जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आप सभी को पता ही होगा द्वारका नगरी को भगवान श्री कृष्ण के सबसे पवन और सुंदर स्थान में से एक माना गया है।

द्वारका नगरी भारत के गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका जिले में स्थित एक प्राचीन नगरी और नगर पालिका है। द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे और मंडल प्रदीप के पश्चिमी तट पर बसा हुआ एक हिंदुओं का बहुत बड़ा शहर है। द्वारका की एक अलग ही कहानी है जिससे हम किसी और आर्टिकल में सुनाएंगे।

3) जगन्नाथ पुरी उड़ीसा – Char Dham ke Naam

चारों धाम में से तीसरे नंबर पर आने वाली भारत के पूर्व दिशा में स्थित जगन्नाथ पुरी मंदिर को माना जाता है। इस मंदिर की गाथा है कि यहां भगवान का जिंदा एवं फिजिकल दिल को रखा गया है। और इस बात से आप लोग भली भाति परचित होंगे। चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी की बहुत सारी कहानी है

इन्हीं में से एक कहानी है कि जगन्नाथ पुरी का झंडा हमेशा हवा के उल्टा दिशा में उड़ता है। और यही नहीं कहा ये भी जाता है की कलयुग की शुरुआत जग्गंनाथ पूरी से ही होगी। और इन्ही सारी दिव्या घटनाओ के चलते इस मंदिर को चार धामों में शामिल किया गया है। और भी अनेक कहानियां हैं कैसे कई से पौराणिक कथाओं में इसका उल्लेख मिलता है

4) रामेश्वरम धाम तमिलनाडु – Char Dham Yatra Name

भारत के सबसे अंतिम छोर एवं दक्षिणी भाग में स्थित रामेश्वरम मंदिर चार धामों में चौथे स्थान पर आता है। जिसे भारत का अंतिम छोर भी कहा जाता है। रामेश्वरम धाम की एक अलग ही महिमा है। हमारे रावण वध के समय जब भगवान राम को रामसेतु बनाने की जरूरत पड़ी तब स्वयं प्रभु श्री राम जी ने ही रामेश्वरम में भगवान भोलेनाथ जी की स्थापना की थी।

कहा जाता है कि यहां पर तीनों त्रिदेवों की मूर्ति है। कई लोगों की मानना ये भी है कि यहां पर भगवान श्री राम और भगवान भोलेनाथ की ही मूर्ति है। इन चार धामों में से रामेश्वरम धाम भी बहुत बड़ी महिमा और अपारशक्ति वाले धामों में से एक हैं।

Char Dham Kaun Kaun se hain: इन चार धामों की यात्रा करने से आपको मनवांछित फल की प्राप्ति होगी। कहा जाता है कि जो लोग भी इन चार धाम की यात्रा को पूरा करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। और उनके आने वाले जीवन और मृत्यु पर अंकुश लग जाता है। और उन्हें शिवलोक, हरीलोक या स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। इसी के चलते अपने जीवन काल में एक बार आपको जरूर से जरूर इस चार धाम की यात्रा की परिक्रमा पूर्ण करना चाहिए।


kikahani

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