200+ तेनालीराम की कहानियां और किस्से | Tenaliram ki kahaniyan in hindi

तेनालीराम की कहानियां (Tenaliram ki kahaniyan in hindi) कौन नहीं सुनना व पढ़ना चाहता, इनकी कहानी होती ही है इतनी मजेदार और ज्ञानवर्धक की कोई नकार नहीं सकता। हम सभी बचपन से ही तेनालीराम के किस्से (Tenaliram ki kahaniyan in hindi) कहानियों को अपने दादा दादी से सुनते आ रहे है किन्तु आज के इस आधुनिक समय में कहा किसे समय है कि वे अपने बच्चो को तेनालीराम के किस्से कहानी सुनाए। पहले तेनालीराम की कहानियां किताबो के माध्यम से हम सभी पढ़ लिया करते थे किन्तु अब इंटरनेट का समय है और किताबो का स्थान ब्लॉग वेबसाइट और वीडियो ने ले लिया है। 

तेनालीराम की कहानियां:

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तो आज हम आपके लिए लेकर आए है तेनालीराम की कहानियों का एक संग्रह, जो आपको और आपके बच्चो को सामाजिक ज्ञान और तार्किक शक्ति प्रदान करने में सहायता करती है साथ ही तेनालीराम की कहानियां मजेदार और आनंददायक भी है। तो देर किस बात की चलिए पढ़ते है चतुर तेनालीराम के किस्से और कहानियां …(Tenaliram ki kahaniyan in hindi)

तेनालीराम का जीवन परिचय | Biography of Tenali Raman– Tenaliram ki kahaniyan

तेनालीराम जिनको तेनाली रामा / तेनाली रमन के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म 16 वीं शताब्दी में आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले के एक छोटे से गांव गरलापाडु में हुआ था। जिस परिवार में इनका जन्म हुआ था वो एक ब्राह्मण परिवार था। इनके माता का नाम अज्ञात था और पिता का नाम गरलापति रमय्या था।

तेनालीराम जब युवा वस्था में थे तभी इनके पिता का देहांत हो गया था। इनके पिता गरलापती रामय्या, तेनाली गाँव के रामलिंगेश्वरास्वामी मंदिर में पुजारी हुआ करते थे। पिता की मृत्यु के बाद इनकी माता ने इन्हे अपने गांव तेनाली लेकर आ गई जंहा पर इनके मामा जी का घर था और तेनालीराम और उनकी माता यही पर रहने लगे। तेनालीराम भगवान शिव जी के भक्त थे। इसलिए इन्हे तेनाली रामलिंगा के नाम से भी संबोधित किया जाता था। 

(200+ Tenaliram ki kahaniyan in hindi)

तेनालीराम एक पेशेवर कवि थे और तेलगु साहित्य के महान ज्ञानी थे। तेनालीराम अपने वाक्चातुर्य के कारण बहुत अधिक प्रसिद्ध थे। इसलिए इन्हे विकटकवि भी का के संबोधित किया जाता है। ये पहले शिव भक्त थे किन्तु बाद में इन्होंने वैष्णव धर्म को स्वीकार कर लिया था।

तेनालीराम को विद्यालय की शिक्षा प्राप्त नहीं थी किन्तु इन्हे सीखने कि इच्छा और ज्ञान प्राप्त करने कि धुन सदैव इनके सिर पर सवार रहती थी जिस कारण इनको शिष्यवृत्ति प्राप्त हुई थी। ये बचपन से ही शिवभक्त थे जिस कारण वैष्णव समाज के अनुयायि इन्हे स्वीकार नहीं कर रहे थे तो एक सज्जन व्यक्ति की सलाह से उन्होंने माता दुर्गा की आराधना व तपस्या की जिसके परिणाम स्वरूप इनको हास्य कवि बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

तेनाली रामा का पुत्र भास्कर :

आगे के जीवन में तेनालीराम ने भागवत कथा मंडल के साथ संपर्क किया और वे भागवत कथा मेला के साथ जुड़कर अलग अलग स्थान पर भागवत कथा मंडल कार्यक्रम आयोजित करने लगे। ऐसे ही कार्यक्रम करते करते उनकी मंडली महाराजा कृष्णदेव राय के दरबार में का पहुंचे और इनका अद्वितीय प्रदर्शन देख महाराजा कृष्णदेव राय अत्यंत प्रभावित हुए और तेनालीराम की बुद्धिमानी चतुराई और ज्ञान से प्रभावित होकर राजा कृष्णदेव राय उन्हें अपने दरबार के अष्ट दिग्गजों की मंडली में बतौर हास्य कवि और सलाहकार के पद पर नियुक्त कर दिया।

तेनालीराम की कहानियां

तेनालीराम राम महराजा कृष्णदेव राय के दरबार में अपना योगदान करने लगे और महाराज को अपनी हास्य कला और बुद्धिमानी से प्रसन्न करने लगे इस प्रकार तेनालीराम राजा के और करीब हो गए। राजा कृष्णदेव राय का विजयनगर की राजगद्दी पर सम्पूर्ण कार्यकाल 1509 से 1529 ई० तक रहा। इस बीच तेनालीराम ने राजा के अनेक असंभव कार्यों को सरलता से पूरा किया। जिसके किस्से और कहानी आज किताबो वीडियो और hindi story blog के माध्यम से मिलते है।

तेनालीराम की मृत्यु कैसे हुई / तेनाली राम की डेथ कैसे हुई?

तेनालीराम की मृत्यु साँप के काटने से हुई थी।

तेनालीराम का संबंध किस साम्राज्य से है?


आज हम उन सभी किस्से और कहानियों को इस लेख में पढ़ने वाले है। आशा करता हूं तेनालीराम का जीवन परिचय जान कर आंनद आया होगा अब चलिए इनके कहानियों को पढ़ते है।


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200+ तेनालीराम की कहानियां

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